संघर्ष से सफलता तक प्रतापगढ़ के नए पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर की कहानी
Published by: ब्यूरो चीफ दीपांशु तिवारी

बेल्हा। हरियाणा के झज्जर जिले के एक छोटे से गांव गौरिया से निकलकर आईपीएस अधिकारी बनने तक का सफर तय करने वाले दीपक भूकर आज उत्तर प्रदेश पुलिस में सख्त लेकिन संवेदनशील अफसर की छवि रखते हैं। 28 जुलाई 1986 को जन्मे दीपक भूकर का बचपन सामान्य ग्रामीण परिवेश में बीता। पिता नरेंद्र पाल सेना से सेवानिवृत्त होकर इंटर कॉलेज में प्रवक्ता बने और माता आशा देवी ने गृहिणी रहते हुए बेटे को संस्कार दिए।
शिक्षा और शुरुआती संघर्ष
गांव के ही सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाले दीपक भूकर ने 2004 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने बॉटनी विषय से बीएससी और एमएससी की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि जीवन में किसी बड़ी जिम्मेदारी वाले पद तक पहुंचना है।
सरकारी नौकरी की शुरुआत उन्होंने एसएससी परीक्षा पास कर सेंट्रल एक्साइज इंस्पेक्टर के रूप में की। लेकिन यहीं रुकना उन्हें मंजूर नहीं था। उन्होंने कड़ी मेहनत के साथ पीसीएस परीक्षा पास की और फिर 2016 बैच में आईपीएस बने।
पुलिस सेवा में कदम
ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग जौनपुर जिले में हुई। यहाँ उन्होंने थाना प्रभारी के रूप में काम किया। इसके बाद मुरादाबाद में एएसपी और कानपुर कमिश्नरी में भी सेवाएँ दीं। आगे चलकर वे हापुड़ के एसपी बने और अपने सख्त फैसलों से अपराधियों में खौफ पैदा किया। बाद में उन्हें प्रयागराज और वर्तमान में उन्नाव जिले का एसपी बनाया गया।
सख्त लेकिन न्यायप्रिय छवि
दीपक भूकर की कार्यशैली में अपराधियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस साफ झलकता है।
रिश्वत लेते पकड़े गए दारोगा को उन्होंने तुरंत निलंबित किया।
अनुशासनहीनता दिखाने वाले निरीक्षकों को लाइन हाजिर कर दिया।
अपराधियों पर ऐसी सख्ती दिखाई कि कई माफिया कोर्ट में आत्मसमर्पण करने को मजबूर हुए।
विवाद और चुनौतियाँ
कठोर अनुशासन लागू करने की वजह से कई बार उनके फैसलों पर सवाल भी उठे। कुछ लोग पुलिसकर्मियों के लगातार तबादले और सख्ती को कठोरता मानते हैं। लेकिन जनता के बीच उनकी छवि एक ईमानदार और निष्पक्ष पुलिस कप्तान की है।
जनसेवा की भावना
अपराध नियंत्रण के साथ-साथ हादसों और आपदाओं के समय दीपक भूकर खुद मौके पर पहुंचते हैं। पीड़ितों की मदद करना और जनता की समस्याओं को सुनना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
निष्कर्ष
हरियाणा के छोटे से गांव से निकलकर आज उत्तर प्रदेश की पुलिस सेवा में अपनी पहचान बनाने वाले आईपीएस दीपक भूकर युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनका संघर्ष यह बताता है कि मेहनत और ईमानदारी से कोई भी अपने सपनों को पूरा कर सकता है।



