डॉ. बी. आर. अंबेडकर राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित हुए अर्पित सर्वेश
ब्यूरो चीफ दीपांशु तिवारी
बेल्हा। साहित्य की दुनिया में एक बार फिर प्रतापगढ़ का गौरव बढ़ा है। जनपद के युवा बहुभाषी साहित्यकार, विश्व रिकॉर्डधारी और प्रेरणादायक व्यक्तित्व अर्पित सर्वेश को उनकी असाधारण लेखनी, समाज में जागरूकता फैलाने के प्रयास और साहित्य के क्षेत्र में अनूठे योगदान के लिए प्रतिष्ठित डॉ. बी. आर. अंबेडकर राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उनके साहित्यिक सफर और सामाजिक दृष्टिकोण की भी स्वीकृति है।
अर्पित की कलम शब्दों से कहीं अधिक लिखती है — वह भावनाओं को आकार देती है, विचारों को दिशा देती है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की लौ प्रज्वलित करती है। उनकी रचनाओं में जीवन की गहराइयों को छूने वाली संवेदनाएं, मानवीय मूल्यों का संदेश और बदलाव की प्रबल प्रेरणा स्पष्ट रूप से झलकती है। जो भी उनकी लेखनी को पढ़ता है, वह विचारों की नई रोशनी से आलोकित होता है।
अब तक अर्पित 27 पुस्तकों का सृजन कर चुके हैं, जिनमें 15 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में प्रकाशित कृतियां शामिल हैं। उनके शब्दों की पहुंच प्रतापगढ़ की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक जा चुकी है। 150 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संकलनों में उनकी कविताएं और लेख प्रकाशित हो चुके हैं, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा और व्यापक दृष्टिकोण का प्रमाण हैं।
उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए उन्हें पहले भी कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें इंटरनेशनल आइकन अवॉर्ड 2024, ब्रह्मर्षि सम्मान 2024, विश्व साहित्य रत्न सम्मान, भारत गौरव सम्मान, और तीन विश्व रिकॉर्ड प्रमाणपत्र शामिल हैं। इसके साथ ही, वे कुर्दिश भाषा में पुस्तक प्रकाशित करने वाले पहले भारतीय भी हैं, जो उनकी रचनात्मकता की वैश्विक पहुंच को दर्शाता ह।
निस्संदेह, साहित्य के विस्तृत आकाश में अर्पित सर्वेश का यह सफर एक ऐसे सितारे की भांति है, जिसकी चमक आने वाले वर्षों में और भी प्रखर होती जाएगी।का गौरव बढ़ा है। जनपद के युवा बहुभाषी साहित्यकार, विश्व रिकॉर्डधारी और प्रेरणादायक व्यक्तित्व अर्पित सर्वेश को उनकी असाधारण लेखनी, समाज में जागरूकता फैलाने के प्रयास और साहित्य के क्षेत्र में अनूठे योगदान के लिए प्रतिष्ठित डॉ. बी. आर. अंबेडकर राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उनके साहित्यिक सफर और सामाजिक दृष्टिकोण की भी स्वीकृति है।
अर्पित की कलम शब्दों से कहीं अधिक लिखती है — वह भावनाओं को आकार देती है, विचारों को दिशा देती है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की लौ प्रज्वलित करती है। उनकी रचनाओं में जीवन की गहराइयों को छूने वाली संवेदनाएं, मानवीय मूल्यों का संदेश और बदलाव की प्रबल प्रेरणा स्पष्ट रूप से झलकती है। जो भी उनकी लेखनी को पढ़ता है, वह विचारों की नई रोशनी से आलोकित होता है।
अब तक अर्पित 27 पुस्तकों का सृजन कर चुके हैं, जिनमें 15 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में प्रकाशित कृतियां शामिल हैं। उनके शब्दों की पहुंच प्रतापगढ़ की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक जा चुकी है। 150 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संकलनों में उनकी कविताएं और लेख प्रकाशित हो चुके हैं, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा और व्यापक दृष्टिकोण का प्रमाण हैं।
उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए उन्हें पहले भी कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें इंटरनेशनल आइकन अवॉर्ड 2024, ब्रह्मर्षि सम्मान 2024, विश्व साहित्य रत्न सम्मान, भारत गौरव सम्मान, और तीन विश्व रिकॉर्ड प्रमाणपत्र शामिल हैं। इसके साथ ही, वे कुर्दिश भाषा में पुस्तक प्रकाशित करने वाले पहले भारतीय भी हैं, जो उनकी रचनात्मकता की वैश्विक पहुंच को दर्शाता है।
निस्संदेह, साहित्य के विस्तृत आकाश में अर्पित सर्वेश का यह सफर एक ऐसे सितारे की भांति है, जिसकी चमक आने वाले वर्षों में और भी प्रखर होती जाएगी।



