6th April 2025

उत्तर प्रदेश

ईद को लेकर मुरादनगर पुलिस ने रखी शांति सीमित मीटिंग

रिपोर्ट : अबशार उलहक

देशभर में सभी उत्सवों को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न कराना राज्य प्रशासन और पुलिस के लिए हमेशा एक बड़ी जिम्मेदारी रही है। इसी कड़ी में, ईद-उल-फितर 2025 के मद्देनजर मुरादनगर पुलिस ने ईदगाह रोड़ चामुंडा चौकी परिसर में शांति समिति की बैठकें आयोजित कीं, ताकि इस महत्वपूर्ण त्योहार को शांति और व्यवस्था के साथ मनाया जा सके। इस आयोजन में केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए और सामुदायिक सहयोग और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का सभी मौजूद गणमान्य लोगों ने वादा किया।

ईद-उल-फितर, जिसे मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है, मुस्लिम समुदाय के लिए रमज़ान के पवित्र महीने के समापन का प्रतीक है। यह त्योहार नमाज़, दान, और सामुदायिक एकता के साथ मनाया जाता है। हालांकि पुलिस के लिए सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करना एक चुनौती बन जाता है। मुरादनगर पुलिस ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए शांति समिति की बैठकों के माध्यम से स्थानीय समुदाय, धार्मिक गुरूओं व नेताओं और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास किया गया। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य त्योहार के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और सभी समुदायों के बीच सौहार्द बनाए रखना था। इस दौरान मुरादनगर थानाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि ईद की नमाज़ मस्जिदों और ईदगाहों के भीतर ही अदा की जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस पिकेट्स लगाए गए है और सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए विशेष सेल सक्रिय किए गए ताकि भड़काऊ पोस्ट या अफवाहों को शेयर करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके अलावा, ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए निगरानी की व्यवस्था की गई।

थानाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह तोमर ने कुछ प्रमुख बिंदुओं पर दिया जोर :

1. सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ से परहेज :- पुलिस ने समुदाय से अपील की कि नमाज़ को मस्जिदों या निर्धारित स्थानों पर ही अदा किया जाए, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

2. सुरक्षा व्यवस्था :- संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (QRTs) की तैनाती, और अतिरिक्त पुलिस बल की मौजूदगी सुनिश्चित की गई।

3. सामुदायिक सहयोग :- नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल सूचना पुलिस को देने का आग्रह किया गया।

4. परंपराओं का सम्मान :- यह भी सुनिश्चित किया गया कि सभी धार्मिक परंपराओं का पालन पारंपरिक तरीके से हो, लेकिन किसी भी नए चलन को बढ़ावा न दिया जाए जो विवाद का कारण बन सके।

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