4th March 2024

उत्तर प्रदेश

राज्यपाल ने वापस किया गुण्डा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2021, दोबारा पेश किया जाएगा

बता दें कि प्रदेश में कमिश्नरेट की स्थापना के बाद राज्य सरकार ने उप्र गुण्डा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2021 सदन में पेश किया था। दोनों सदनों से विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की अनुमति के लिए भेजा गया था, जिसे राजभवन द्वारा वापस कर दिया गया है

उप्र गुण्डा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2021 को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वापस कर दिया है। बुधवार को विधानसभा में राज्यपाल के संदेश सहित पुनर्विचार के लिए यह विधेयक प्राप्त हुआ, जिसे सदन के पटल पर रखा गया। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार कुछ बदलावों के साथ नया विधेयक लेकर आएगी।

बता दें कि प्रदेश में कमिश्नरेट की स्थापना के बाद राज्य सरकार ने उप्र गुण्डा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2021 सदन में पेश किया था। दोनों सदनों से विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की अनुमति के लिए भेजा गया था, जिसे राजभवन द्वारा वापस कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक पहली बार कमिश्नरेट का गठन होने पर गुण्डा एक्ट के तहत जिला बदर करने का अधिकार पुलिस कमिश्नर को दिया गया था।

तत्पश्चात कुछ अन्य जिलों में भी कमिश्नरेट गठित हुआ, जिसके बाद कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए इसमें संशोधन किया गया और गुण्डा एक्ट लगाने का अधिकार कमिश्नर के अधीनस्थ डीसीपी, एडीसीपी और जेसीपी को दे दिया गया। जबकि अपीलीय अधिकारी कमिश्नर को बना दिया गया।

इस तरह कमिश्नर को गुण्डा एक्ट के तहत जिला बदर करने और अपीलीय अधिकारी होने की दोनों शक्तियां प्राप्त हो गयी, जो नियमों के मुताबिक उचित नहीं है। इसी वजह से राज्यपाल ने इस विधेयक को वापस कर दिया है। बता दें कि जिलों में गुण्डा एक्ट लगाने का अधिकार डीएम को होता है, जबकि अपील सुनने का अधिकार मंडलायुक्त के पास होता है।

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