मुरादनगर: नगरपालिका क्षेत्र के विस्तार के साथ ही सहबिस्वा गांव के निवासियों में विकास की उम्मीद जगी थी। मुरादनगर नगरपालिका में शामिल होने के बाद इस छोटी सी बस्ती में विकास कार्यों की शुरुआत जोर-शोर से हुई, लेकिन यह उत्साह अब अधूरे वादों और लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। बस्ती की सड़कों पर कीचड़ और गंदगी का आलम है, जिससे स्थानीय लोगों, खासकर बच्चों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सहबिस्वा की तंग सड़को में कीचड़ से भरे रास्ते न केवल आवागमन को दूभर बना रहे हैं, बल्कि बच्चों के लिए स्कूल जाना भी किसी जंग से कम नहीं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ठेकेदारों ने काम शुरू तो किया, लेकिन उसे आधा-अधूरा छोड़कर चंपत हो गए। एक स्थानीय निवासी ने बताया की “ठेकेदारों को पता था कि यह इलाका पहले से उपेक्षित रहा है, लेकिन उन्होंने काम पूरा करने की बजाय सिर्फ खानापूरी की और चले गए।”
इलाके में गंदगी का हाल और भी बदतर है। कूड़े-करकट से भरे नाले न सिर्फ बदबू फैला रहे हैं, बल्कि आसपास के लोगों में बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। नाले की सफाई को लेकर नगरपालिका की उदासीनता से लोग खासे नाराज हैं। जिसमे एक निवासी का कहना है कि “नाले की गंदगी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन नगरपालिका को कोई फिक्र नहीं।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहरी विकास का ढोल पीटने वाली मुरादनगर नगरपालिका की इस ओर कोई ध्यान नहीं है। विकास के नाम पर शुरू हुए कार्य अधर में लटके हैं और बुनियादी सुविधाओं का अभाव लोगों के सब्र का इम्तिहान ले रहा है। सवाल यह है कि आखिर कब सहबिस्वा के निवासियों को विकास की इस लहर का असली लाभ मिलेगा?



