उत्तर प्रदेश

गाजियाबाद पुलिस के तीन शूरवीरों को गैलेंट्री अवार्ड

रिपोर्ट : अबशार उलहक

गाजियाबाद : दिन की चकाचौंध में गोलियों की तड़तड़ाहट, खौफ के साये में डूबा मुरादनगर, और एक कुख्यात अपराधी मोनू जाट, जिसने व्यापारियों की नींद उड़ा रखी थी। लेकिन गाजियाबाद पुलिस के तीन जांबाजों—मुकेश सोलंकी, अरुण कुमार और टिंकल चौधरी—ने अपनी जान की बाजी लगाकर इस आतंक का अंत किया। उनकी इस वीरता ने उन्हें राष्ट्रपति के प्रतिष्ठित वीरता पदक (गैलेंट्री अवार्ड) का हकदार बनाया है। यह कहानी न केवल साहस और समर्पण की है, बल्कि उस जज्बे की है, जो अंधेरे में भी उम्मीद की किरण जगाता है।

खौफ का दूसरा नाम: मोनू जाट

‎साल 2023 में मुरादनगर की गलियां दहशत के साये में थीं। मोनू जाट उर्फ विशाल, एक ऐसा नाम जो गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में अपराध का पर्याय बन चुका था। हत्या, डकैती, अपहरण, गैंगस्टर एक्ट—उसके खिलाफ 13 संगीन मामले दर्ज थे। 1 अप्रैल 2023 को उखलारसी गांव में विद्युत निगम के ठेकेदार नवीन भारद्वाज की हत्या ने इलाके में सनसनी फैला दी। इसके बाद 23 मई 2023 को मुरादनगर की रेलवे रोड मार्केट में मोबाइल कारोबारी मुकेश गोयल की निर्मम हत्या ने व्यापारियों के दिलों में खौफ भर दिया। दुकानें बंद होने लगीं, व्यापार ठप हो गया, और मोनू जाट पुलिस के लिए खुली चुनौती बन गया। पुलिस ने पहले उस पर 25 हजार रुपये का इनाम रखा, लेकिन मुकेश गोयल की हत्या के बाद इनाम को बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया। मगर मोनू का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा था। यह वह दौर था जब गाजियाबाद पुलिस ने फैसला किया कि अब इस खौफ का अंत होना चाहिए।

वह दिन, जब साहस ने बदमाश का खात्मा किया

‎2 जून 2023 का दिन मुरादनगर के इतिहास में अमर हो गई। मुरादनगर थाने की पुलिस और ग्रामीण जोन की स्वाट टीम ने एक संयुक्त ऑपरेशन में मोनू जाट को घेर लिया। मुठभेड़ ऐसी थी कि हर पल जान का जोखिम था। दोनो तरफ से गोलियां चल रही थीं, और दिन के उजाले में सुनसान रास्ते पर सिर्फ साहस की गूंज सुनाई दे रही थी। तत्कालीन थाना प्रभारी मुकेश सोलंकी को सबसे पहले सीने पर गोली गनीमत ये रही वो गोली उस समय बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी, हेड कांस्टेबल अरुण कुमार और टिंकल चौधरी भी गोलियों से घायल हो गए। लेकिन इन जांबाजों का हौसला अडिग रहा। अपनी चोटों और भय को नजरअंदाज करते हुए उन्होंने मोनू जाट को ढेर कर दिया। उस दिन मुरादनगर की सड़कों पर खौफ का अंत हुआ, और पुलिस की वीरता की कहानी लिखी गई।

जांबाजों का परिचय

मुकेश सोलंकी : मुरादनगर के तत्कालीन थाना प्रभारी, जिनके नेतृत्व में यह ऑपरेशन कामयाब हुआ। वर्तमान में लोनी थाने के प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

अरुण कुमार: स्वाट टीम के हेड कांस्टेबल, जिन्हें अब दरोगा के रूप में पदोन्नति मिल चुकी है। वह मसूरी थाने की नाहल पुलिस चौकी के इंचार्ज हैं।

टिंकल चौधरी: स्वाट टीम के हेड कांस्टेबल, जिनके साहस ने मुठभेड़ में निर्णायक भूमिका निभाई। वह अभी भी ग्रामीण जोन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

सम्मान की घड़ी

‎इन तीनों शूरवीरों की बहादुरी को देखते हुए राष्ट्रपति ने उन्हें वीरता पदक से सम्मानित करने की घोषणा की है। जल्द ही राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में इन जांबाजों को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने इन नायकों को बधाई दी है। यह सम्मान न केवल उनकी वीरता का प्रतीक है, बल्कि हर उस पुलिसकर्मी के लिए प्रेरणा है, जो समाज की सुरक्षा के लिए दिन-रात मेहनत करता है।

एक नई सुबह

‎मोनू जाट के खात्मे के बाद मुरादनगर की गलियों में फिर से चहल-पहल लौट आई। व्यापारियों के चेहरों पर मुस्कान बिखरी, और जनता का पुलिस पर भरोसा और मजबूत हुआ। यह कहानी सिर्फ एक मुठभेड़ की नहीं, बल्कि उस जज्बे की है, जो डर को हौसले से कुचल देता है। मुकेश सोलंकी, अरुण कुमार और टिंकल चौधरी की यह गाथा गाजियाबाद के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो चुकी है।

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