अपना दल (एस) में बगावती सुरों पर अनुप्रिया पटेल की कड़ी चेतावनी, आशीष पटेल ने रचा जा रहा षड्यंत्र बताया
Published by धर्मेंद्र शर्मा
लखनऊ: अपना दल (एस) में उठ रहे बगावती सुरों और कुछ नेताओं के दावों के बीच पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए तीखा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में फूट डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और कार्यकर्ताओं को ऐसे तत्वों से सावधान रहना चाहिए।
अनुप्रिया पटेल बुधवार को रवींद्रालय में आयोजित डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर ‘जन स्वाभिमान दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि विरोध और षड्यंत्र केवल ताकतवर और ईमानदार लोगों के खिलाफ होते हैं। “हमें अपने सिद्धांतों और वैचारिक मुद्दों से नहीं भटकना है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने जातिगत जनगणना के मुद्दे पर केंद्र सरकार की सराहना की और कहा कि अपना दल (एस) ने अपनी स्थापना के समय से ही जातिगत जनगणना की मांग की थी। “यह समाज को तोड़ने वाला नहीं, बल्कि जोड़ने वाला कदम है। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र के सपने को केंद्र सरकार ने साकार किया है,” उन्होंने जोड़ा।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सचिव-किसान मंच प्यारे लाल पटेल, प्रदेश महासचिव रमेश पटेल और राष्ट्रीय सचिव जगन्नाथ पटेल को ‘डॉ. सोनेलाल पटेल सम्मान’ से नवाजा गया। राष्ट्रीय सचिव माता बदल तिवारी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। इस दौरान बलरामपुर से बसपा और सपा के कई पूर्व पदाधिकारियों ने साथियों सहित अपना दल (एस) की सदस्यता ग्रहण की, जिससे पार्टी में नए उत्साह का संचार हुआ।
“साजिश की जा रही है अपना दल को खत्म करने की” — आशीष पटेल
प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष आशीष पटेल ने इशारों में पार्टी को कमजोर करने के प्रयासों को गंभीर षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने दावा किया कि कुछ ताकतवर लोग 1700 करोड़ रुपये तक की ताकत झोंककर अपना दल (एस) को खत्म करना चाहते हैं।
“मैं आशंका जताता हूं कि भविष्य में मुझे किसी फर्जी मुकदमे में फंसाया जा सकता है। सहयोगी दलों के बीच भेदभाव क्यों नहीं, केवल अपना दल के साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है?” आशीष पटेल ने सवाल उठाया।
9 विधायकों के समर्थन के दावे की खुली पोल
पार्टी में बगावती नेताओं ने एक दिन पहले दावा किया था कि उनके साथ 9 विधायक हैं, लेकिन बुधवार को हुए कार्यक्रम में 13 में से 12 विधायक मौजूद रहे, जिससे बागी गुट के दावे की पोल खुल गई। सिर्फ शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा अनुपस्थित रहे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, वर्मा किसी आवश्यक कार्य से बाहर थे और उन्होंने नेतृत्व को पूर्व सूचना दी थी।
राजनीतिक विश्लेषण:
बगावती सुरों के बीच पार्टी नेतृत्व की यह शक्ति-प्रदर्शन रणनीति पार्टी को एकजुट करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। जातिगत जनगणना, सामाजिक न्याय और राजनीतिक षड्यंत्र जैसे विषयों को मंच पर मजबूती से उठाकर पार्टी ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह संघर्ष के लिए तैयार है और संगठनात्मक ताकत कमजोर नहीं हुई है।
इस कार्यक्रम ने जहां पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया, वहीं बागी नेताओं को साफ संदेश दिया कि नेतृत्व अब समझौता नहीं करेगा।



