उत्तर प्रदेशदेश

‎’हाईटेक’ नोएडा में सिस्टम की मौत: तड़पता रहा इंजीनियर युवराज, समय पर नहीं पहुंची मदद

रिपोर्ट : धर्मेंद्र शर्मा

नोएडा: जिसे हम “स्मार्ट सिटी” और “हाईटेक शहर” कहते हैं, उसी नोएडा के सेक्टर-150 से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने प्रशासन और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम के दावों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। 27 वर्षीय होनहार इंजीनियर युवराज की दर्दनाक मौत ने यह कड़वा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आम नागरिक की जान की कीमत केवल कागजों और चुनावी वादों तक सीमित है?

मौत से पहले का वो आखिरी संघर्ष

‎युवराज सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक परिवार का सपना था। घटना के वक्त वह अकेला नहीं था; उसके पास उसका फोन था, उसकी हिम्मत थी और जीने की जिद थी। उसने आखिरी समय तक संघर्ष किया। उसने मदद के लिए फोन किया, अपनी सटीक लोकेशन साझा की और बार-बार गुहार लगाई। वह घंटों जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा, इस उम्मीद में कि कोई तो आएगा। लेकिन अफसोस, जब सिस्टम को पहुंचना था, तब वहां सिर्फ सन्नाटा था।

प्रशासनिक लापरवाही के गहरे सवाल

‎यह हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्थागत विफलता है। युवराज की मौत के बाद आज हर नागरिक प्रशासन की दहलीज पर ये सवाल पूछ रहा है:

इमरजेंसी रिस्पॉन्स का सच: जब युवराज ने अपनी लोकेशन भेज दी थी, तो पुलिस और रेस्क्यू टीमें समय पर क्यों नहीं पहुंचीं?

स्मार्ट सिटी का खोखलापन: अरबों के इंफ्रास्ट्रक्चर वाले शहर में क्या एक इमरजेंसी कॉल पर तत्काल सहायता पहुंचाने की तकनीक आज भी फेल है?

जवाबदेही किसकी: क्या जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होगी या उन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी जिनकी देरी ने एक चिराग बुझा दिया?

“न्याय तब तक अधूरा, जब तक जीवन न बचे”

‎आज नेताओं के शोक संदेश और अधिकारियों की औपचारिक जांच के आदेश उस पिता के आंसू नहीं पोंछ सकते जिसने अपने जवान बेटे के शव को कंधा दिया है। युवराज के परिवार के लिए ये शब्द खोखले हैं। न्याय का असली अर्थ तब होता है जब संकट में फंसे व्यक्ति को समय पर सहायता मिले। जब जीवन ही चला गया, तो उसके बाद मिलने वाली सांत्वना केवल एक रस्म अदायगी बनकर रह जाती है।

एक गंभीर चेतावनी

‎युवराज की मौत हम सबके लिए एक चेतावनी है। यह घटना साबित करती है कि हम चाहे कितने भी “स्मार्ट” होने का दावा कर लें, लेकिन अगर हमारी व्यवस्था में संवेदनशीलता और तत्परता नहीं है, तो सब व्यर्थ है। आज युवराज गया है, कल कोई और इस लापरवाही की भेंट चढ़ सकता है।

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