कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों की पहचान को लेकर नई रणनीति, अब नाम नहीं दुकान की जानकारी होगी सार्वजनिक
Published by धर्मेंद्र शर्मा
लखनऊ।उत्तर प्रदेश में शुरू हो रही कांवड़ यात्रा को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक अहम निर्णय लिया है। कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित खाद्य प्रतिष्ठानों की पहचान को लेकर अब नई रणनीति अपनाई गई है। दुकानों पर दुकानदारों के नाम की बजाय अब केवल दुकान का नाम और उसका विवरण ही सार्वजनिक रूप से दर्शाया जाएगा।
यह फैसला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (FSDA) द्वारा उस स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जहां दुकानों पर दुकानदार का नाम लिखवाने के निर्देश तो दिए गए, लेकिन एफएसडीए के अधिनियमों में इसका कोई स्पष्ट प्रावधान मौजूद नहीं है।
नई व्यवस्था : ग्राहक संतुष्टि फीडबैक प्रपत्र अनिवार्य
एफएसडीए ने इसके समाधान के रूप में ग्राहक संतुष्टि फीडबैक प्रपत्र तैयार किया है, जिसे अब हर खाद्य विक्रेता को अपनी दुकान पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। इस प्रपत्र में निम्न जानकारियाँ शामिल होंगी:
- एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर
- दुकान का नाम
- पता
- मोबाइल नंबर
- ईमेल आईडी (यदि उपलब्ध हो)
- टोल फ्री नंबर
- फूड सेफ्टी कनेक्ट एप के तहत क्यूआर कोड
ग्राहक इस क्यूआर कोड को स्कैन करके संबंधित दुकान के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जिसमें दुकानदार का नाम और लाइसेंस संबंधी विवरण भी शामिल होगा।
मिलावट की शिकायत पर घंटेभर में होगी कार्रवाई
नई प्रणाली के अंतर्गत ग्राहक न केवल खाद्य सामग्री की गुणवत्ता का फीडबैक दे सकेंगे, बल्कि यदि उन्हें किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट की आशंका है तो उसकी तत्काल शिकायत भी कर सकेंगे। शिकायत के लिए ग्राहकों को केवल यह बताना होगा कि उन्होंने क्या खाया और उसमें किस तरह की मिलावट का संदेह है।
यह जानकारी जैसे ही विभाग को मिलेगी, उसे तत्काल संबंधित क्षेत्र के खाद्य निरीक्षक को भेजा जाएगा। प्राथमिक जांच में यदि संदेह की पुष्टि होती है तो संबंधित खाद्य पदार्थ को नष्ट कर दिया जाएगा और आवश्यक कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
खुद जांच कराने की भी मिलेगी सुविधा
एफएसडीए इस बार सतर्कता को लेकर काफी सक्रिय दिख रहा है। विभाग द्वारा कांवड़ मार्गों पर विशेष मिलावट जांच अभियान चलाया जाएगा। श्रद्धालुओं और आम ग्राहकों को जागरूक करने के लिए मोबाइल वैन भी लगाई जाएंगी, जिनमें खाद्य पदार्थों की ऑन-द-स्पॉट जांच की सुविधा उपलब्ध होगी।
इसके अतिरिक्त विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बताया जाएगा कि कौन-कौन से सामान्य संकेतों से लोग मिलावट का अंदाजा लगा सकते हैं। इसमें घी, दूध, मसाले, नमकीन, मिठाई आदि मुख्य फोकस में रहेंगे।
ग्राहकों से फीडबैक जुटाकर मिलेगी रिपोर्ट
एफएसडीए के अधिकारी इस बार सिर्फ निरीक्षण तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यात्रियों से प्रत्यक्ष फीडबैक भी लिया जाएगा। जो ग्राहक एप या प्रपत्र के माध्यम से प्रतिक्रिया देंगे, उनकी शिकायतों को विभाग की कंट्रोल रूम टीम द्वारा मॉनिटर किया जाएगा। इसके आधार पर विभाग यह तय करेगा कि किन दुकानों पर ज्यादा शिकायतें मिल रही हैं और वहां क्या कार्रवाई जरूरी है।
क्या कहते हैं अधिकारी
एफएसडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,
“कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से गुजरते हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा प्राथमिक दायित्व है। इस बार तकनीकी माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाया गया है। ग्राहक स्वयं शिकायत कर सकेंगे और कार्रवाई भी देख सकेंगे।”
कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकान संचालन से संबंधित पारदर्शिता और खाद्य सुरक्षा के मामले में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे न सिर्फ ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि दुकानदारों में भी गुणवत्ता को लेकर सजगता आएगी। डिजिटल निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के माध्यम से एफएसडीए ने यात्रा मार्गों पर मिलावटखोरी रोक



