सरकार की गड्ढा मुक्त सड़क के सपने पर जिले के सरकारी जिम्मेदार पलीता लगाने का कार्य कर रहे हैं, ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर खुद बनाई सड़क
Published by: ब्यूरो चीफ दीपांशु तिवारी

गौरा। प्रदेश सरकार के गड्ढा मुक्त सड़क के दावे जिले में हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। गौरा रेलवे स्टेशन से बेहदौल की तरफ जाने वाली लोक निर्माण विभाग की सड़क गड्ढों में तब्दील होकर लोगों की परेशानियों का सबब बनी हुई है। प्रतिदिन इस मार्ग से हजारों की संख्या में यात्री आवाजाही करते हैं और आए दिन दुर्घटनाएं भी घट रही हैं।
सड़क की बदहाली के साथ ही बुढ़ौरा बाजार में गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे आमजन को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह बेलगाम हो गए हैं, वे जनता की समस्याओं का निस्तारण नहीं करते।
विधायक-सांसद की चुप्पी से जनता नाराज़
क्षेत्रीय विधायक और सांसद पर भी ग्रामीणों ने लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि मंचों पर विकास की गंगा बहाने का दावा करने वाले जनप्रतिनिधि जनता की वास्तविक समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देते। बीते एक साल से ग्रामीण विधायक, सांसद और पीडब्ल्यूडी के चक्कर लगाते रहे, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों ने खुद उठाया जिम्मा
आखिरकार तंग आकर ग्रामीणों ने चंदा लगाकर खुद सड़क को दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया। ग्रामीणों ने सामूहिक सहयोग से इकट्ठा की गई धनराशि और श्रमदान से करीब 100 मीटर गड्ढा युक्त सड़क पर ईंट व रावीश डालकर उसे चलने योग्य बनाया।
जनता में आक्रोश, पर ग्रामीणों की सराहना
ग्रामीणों की इस पहल की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। लोग कहते हैं कि जब सरकार और विभागीय कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम हैं, तब जनता ने मिलकर मिसाल पेश की है। वहीं दूसरी ओर, विधायक और सांसद की चुप्पी तथा पीडब्ल्यूडी की लापरवाही को लेकर जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार ज्ञापन देने के बाद भी सरकारी कर्मचारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। मजबूरी में गांव वालों ने श्रमदान और चंदे से सड़क निर्माण कराया, तभी सड़क पर आना-जाना संभव हो सका।
👉 ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शेष सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।



