उत्तर प्रदेश

बिसरख पुलिस ने नोट बदलने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार, 4.83 लाख रुपये और 3 लग्जरी गाड़ियां बरामद

Published by धर्मेंद्र शर्मा

सेंट्रल नोएडा (पुष्पेंद्र कुमार):बिसरख थाना पुलिस ने नोट बदलने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से ठगी की रकम 4,83,500 रुपये, घटना में प्रयुक्त तीन लग्जरी वाहन और अन्य सामान बरामद किया है। गिरोह भोले-भाले व्यापारियों को 500-500 रुपये के बड़े नोटों को बदलकर अधिक रकम देने का झांसा देता था और फिर मौके से फरार हो जाता था।

घटना का खुलासा

अमरोहा निवासी रोबिन और उसके मित्र विवेक मिश्रा ने थाना बिसरख में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उन्हें आरोपी पवन कुमार मिश्र ने लोकेश मिश्रा उर्फ अनिल शर्मा और अन्य साथियों से मिलवाया था। आरोपियों ने दावा किया कि अगर वे 10 लाख रुपये देंगे तो बदले में उन्हें छोटे नोटों (₹100 और ₹200) में 12 लाख रुपये वापस मिलेंगे।

 

इस लालच में आकर रोबिन और विवेक मिश्रा ने 1 जुलाई को चेरी काउंटी बिसरख स्थित पेट्रोल पंप पर आरोपियों को 10 लाख रुपये दिखाए। तभी मौका पाकर आरोपी पवन, लोकेश, संजीव और अरमान मिलकर रुपयों से भरा बैग लेकर तीन अलग-अलग गाड़ियों में फरार हो गए।

तीन आरोपी गिरफ्तार, एक फरार

थाना बिसरख पुलिस ने 5 जुलाई को कार्रवाई करते हुए लोकेश मिश्रा उर्फ अनिल शर्मा (निवासी निवाड़ी, मध्यप्रदेश), पवन कुमार मिश्र (निवासी अमेठी), और संजीव (निवासी जींद, हरियाणा) को रोजा याकूबपुर क्षेत्र से गिरफ्तार किया।

 

पुलिस ने इनके कब्जे से:

सलाविया कार (DL 7CW 6906)

I20 कार (DL 12CG 4283)

स्कार्पियो (UP 14GK 1733)

₹4,83,500 की नकदी

बरामद की है। गिरोह का एक सदस्य अरमान अब भी फरार है जिसकी तलाश की जा रही है।

पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे

गिरफ्तार आरोपी लोकेश मिश्रा ने बताया कि वह गिरोह का मुखिया है और पहले भी गाजियाबाद व झांसी में इसी तरह की ठगी के मामलों में जेल जा चुका है। गिरोह का मुख्य काम पैसे वालों से संपर्क कर उन्हें अधिक रकम दिलाने का लालच देना और फिर योजना के तहत ठगी करना था।

 

पवन मिश्रा ने बताया कि वह लॉजिस्टिक बिजनेस में होने के कारण उसकी पहुंच अमीर लोगों तक है। वह भोले-भाले लोगों को जाल में फंसाता और गिरोह के अन्य सदस्यों से मिलवाता था।

संजीव ने पूछताछ में बताया कि पवन मिश्र पहले भी दो पार्टियों को लेकर आया था, लेकिन वे लोग उनकी योजना में नहीं फंसे थे। इस बार रोबिन और विवेक को ठगने की योजना सफल रही।

पुलिस का बयान

डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि आरोपी सुनियोजित तरीके से ठगी करते थे और वारदात में हर बार अलग-अलग गाड़ियां इस्तेमाल करते थे ताकि पहचान न हो सके। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

 

साथ ही फरार आरोपी अरमान की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है और पीड़ित की रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया भी जारी है।

निष्कर्ष

इस मामले से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में लोग ठगी का शिकार हो सकते हैं। पुलिस ने समय पर कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को पकड़ कर बड़ा खुलासा किया

है। आम जनता से अपील है कि किसी भी लालच में न आएं और इस तरह की योजनाओं से दूर रहें।

 

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