उत्तर प्रदेश

पर्यावरण एनओसी अब 10 से 40 दिन में, यूपी में प्रदूषण नियंत्रण तंत्र होगा और मजबूत : सीएम योगी

Published by धर्मेंद्र शर्मा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उद्योगों को पर्यावरण संबंधी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) पाने में अब पहले से कहीं कम समय लगेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की समीक्षा बैठक के दौरान निर्देश दिया कि अलग-अलग श्रेणी के उद्योगों के लिए एनओसी आवेदनों का निस्तारण 120 दिनों के बजाय 10 से 40 दिन में किया जाए। इससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लाल श्रेणी के उद्योगों के लिए एनओसी 40 दिन में, नारंगी श्रेणी के लिए 25 दिन में और हरी श्रेणी के लिए केवल 10 दिन में जारी होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इसके लिए आवश्यक तंत्र विकसित किया जाए और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।

बैठक में उन्होंने प्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पुनर्गठन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। योगी ने कहा कि बोर्ड का गठन 1995 में हुआ था, तब से अब तक प्रदेश की औद्योगिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र के अनुरूप बोर्ड के ढांचे और कार्यप्रणाली को भी बदला जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश के 75 जिलों में 28 क्षेत्रीय कार्यालय कार्यरत हैं। इन्हें 18 मंडलों के आधार पर पुनर्गठित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय स्थापित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन मंडलों में औद्योगिक गतिविधियां ज्यादा हैं, वहां एक से अधिक क्षेत्रीय कार्यालय खोले जा सकते हैं।

इस समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने नगर विकास विभाग के कामकाज पर भी चर्चा की और अवैध होर्डिंग्स को लेकर सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसी भी स्थान पर अवैध विज्ञापन होर्डिंग नहीं लगने चाहिए और जहां भी लगे हों, उन्हें तत्काल हटाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि खतरनाक होर्डिंग्स के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड को प्राथमिकता दी जाए ताकि यह न केवल सुरक्षित हो बल्कि सूचना के प्रचार-प्रसार का आधुनिक माध्यम भी बने।

सीएम योगी ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी विज्ञापन होर्डिंग किसी महापुरुष की प्रतिमा या चित्र को विकृत न करे। इसके साथ ही उन्होंने नगर निकायों के लिए स्पष्ट और प्रभावी नियमावली तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे विज्ञापन से आय का अच्छा स्रोत विकसित किया जा सके।

इस निर्णय के बाद प्रदेश में उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया और तेज होगी और पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ प्रशासनिक पारदर्शिता को भी बल मिलेगा।

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