उत्तर प्रदेश

विशेष अपील: बच्चियों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों ही सर्वोपरि

ब्यूरो चीफ दीपांशु तिवारी

प्रतापगढ़/रानीगंज: समाज के जिम्मेदार नागरिकों और अभिभावकों से एक गंभीर विशेष अपील यह है कि किसी भी कोचिंग संस्थान में बच्चियों का दाख़िला कराने से पहले उस संस्था और उसके संस्थापक/प्रबंधन के बारे में गहन पड़ताल अवश्य करें।

 

आज शिक्षा के नाम पर जगह-जगह कोचिंग संस्थानों का विस्तार हो चुका है। लेकिन इनमें से कई संस्थान बिना किसी मानक और पंजीयन के चल रहे हैं। इन संस्थानों में न केवल शिक्षा की गुणवत्ता संदिग्ध रहती है, बल्कि बच्चियों की सुरक्षा और सम्मान भी खतरे में पड़ने की आशंका बनी रहती है।

 

बच्चियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

 

आए दिन यह सुनने को मिलता है कि कई कोचिंग संस्थानों में बच्चियों की इज्ज़त से खिलवाड़ जैसी शर्मनाक घटनाएँ घट रही हैं।

 

कई जगहों पर शिक्षक और प्रबंधक की गतिविधियाँ संदेहास्पद पाई गई हैं, लेकिन बिना शिकायत और कार्रवाई के ऐसे लोग बेखौफ होकर संस्थान चलाते रहते हैं।

भीड़भाड़ और बिना निगरानी के चल रहे संस्थानों में बच्चियों पर मानसिक और सामाजिक दबाव बढ़ता है।

अभिभावकों को क्या करना चाहिए?

 

1. संस्था की जांच-पड़ताल करें – यह देखें कि संस्था पंजीकृत है या नहीं।

2. संस्थापक/शिक्षकों का रिकॉर्ड – उनका शैक्षिक और सामाजिक बैकग्राउंड जानें।

3. सुरक्षा इंतज़ाम – सीसीटीवी, महिला स्टाफ़, आपातकालीन हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाओं की पुष्टि करें

4. बच्चियों से संवाद – बच्चियों को पढ़ाई के साथ-साथ सुरक्षा और अनुचित व्यवहार पहचानने की शिक्षा दें।

5. अनुचित गतिविधि की शिकायत – किसी भी तरह का संदेह होने पर तुरंत पुलिस और प्रशासन से संपर

प्रशासन और समाज की जिम्मेदारी

 

प्रशासन को ऐसे संस्थानों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए जो बिना मानक और अनुमति के संचालित हो रहे हैं।

 

प्रत्येक कोचिंग संस्थान के लिए सुरक्षा गाइडलाइन लागू करना आवश्यक है, जिसमें बच्चियों की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि हो।

 

समाज को भी आगे आकर उन मामलों को उजागर करना चाहिए, जहाँ बच्चियों के साथ छेड़छाड़ या अपमानजनक व्यवहार होता है।

 

 

निष्कर्ष

 

शिक्षा का मकसद बच्चों का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बनाना है, लेकिन अगर शिक्षा के नाम पर बच्चियों की इज्ज़त से खिलवाड़ होने लगे तो यह पूरे समाज के लिए शर्मनाक है।

इसलिए अभिभावकों से अपील है कि कोचिंग में एडमिशन से पहले संस्था और उसके संचालकों की पूरी तरह से जांच करें। प्रशासन से भी अपेक्षा है कि ऐसे संस्थानों पर तत्काल रोक लगाकर बच्चियों के सम्मान और सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करे।

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