
इन दिनों सोशल मीडिया पर स्टूडियो घिबली-स्टाइल की तस्वीरों का ट्रेंड जोरों पर है। सोशल मीडिया यूजर्स को अब अपनी तस्वीरों को इस खास एनिमेशन शैली में देखने का बहुत शौक हो गया है। हालांकि, इसी बीच ओपनएआई ने अपनी इमेज जनरेशन नीति में अहम बदलाव किया है। अब यूजर्स चैटजीपीटी के माध्यम से किसी भी असल व्यक्ति की तस्वीर को देखकर घिबली-स्टाइल की तस्वीर नहीं बना सकते।
तस्वीर बनाने के लिए देनी होंगी क्रिएटिव जानकारी
अब यदि कोई यूजर चैटजीपीटी के माध्यम से तस्वीर बनाने की कोशिश करता है, तो उसे एक संदेश मिलेगा कि असल व्यक्ति की तस्वीर से घिबली-स्टाइल की इमेज नहीं बनाई जा सकती। यह बदलाव ओपनएआई की नई नीति के तहत किया गया है, जिसमें असल लोगों की समानता को दोहराने पर रोक लगा दी गई है।
हालांकि, घिबली-स्टाइल की तस्वीरें अब भी बनाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए यूजर्स को अधिक क्रिएटिव इनपुट देना होगा। उदाहरण के लिए, यूजर्स को हेयरस्टाइल, कपड़े, पृष्ठभूमि, मूड या अन्य विशेषताओं को विस्तार से बताना होगा, ताकि चैटजीपीटी उस आधार पर तस्वीर तैयार कर सके।
ओपनएआई के प्रवक्ता का बयान
इस बदलाव पर ओपनएआई के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी अब अधिक सतर्कता बरत रही है, खासकर जब किसी वास्तविक कलाकार की शैली में तस्वीर बनाने की कोशिश की जाती है। यह निर्णय AI टूल्स के माध्यम से कॉपीराइट उल्लंघन से बचने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।
फ्री यूजर्स को करना होगा इंतजार
इसके अलावा, ओपनएआई ने अपनी इमेज जनरेटर सेवा को मुफ्त यूजर्स के लिए रोलआउट करने में देरी की घोषणा की है। इसकी वजह यह है कि इस सेवा की मांग उम्मीद से कहीं अधिक बढ़ गई है। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने ट्विटर पर कहा कि इस फीचर की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, जिससे मुफ्त यूजर्स को इसे उपयोग करने के लिए कुछ समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।