उत्तर प्रदेश

मुरादनगर थाना विवाद: अधिवक्ता का दावा, पुलिस ने की जमानत याचिका में मनमानी

रिपोर्ट : हैदर खान

गाजियाबाद : जनपद गाजियाबाद के सिविल कोर्ट राजनगर में चैंबर नंबर 147 पर वकालत का व्यवसाय करने वाले अधिवक्ता प्रदीप त्यागी ने वेव सिटी की सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) प्रिया श्री पाल और स्थानीय पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। त्यागी ने दावा किया है कि उनके मुवक्किल आयुष त्यागी की जमानत याचिका को स्वीकार करने में प्रशासन द्वारा जानबूझकर देरी की गई और उन्हें तीन दिन तक मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान किया गया।

‎प्रदीप त्यागी के अनुसार, उनके मुवक्किल आयुष त्यागी को 22 अगस्त 2025 को थाना मुरादनगर पुलिस ने एनएनएस एक्ट की धारा 170, 126, और 135 बी के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद, त्यागी ने आयुष की जमानत के लिए याचिका दायर की, लेकिन एसीपी प्रिया श्री पाल और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने कथित तौर पर उनकी याचिका को स्वीकार करने में आनाकानी की। त्यागी का आरोप है कि प्रशासन ने न केवल उनके वकालत के कार्य में बाधा डाली, बल्कि कानून का उल्लंघन करते हुए उनकी सामाजिक छवि को भी धूमिल करने का प्रयास किया। “मैंने अपने मुवक्किल की जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन एसीपी प्रिया श्री पाल और पुलिस प्रशासन ने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया। तीन दिन तक मुझे परेशान किया गया, मेरे काम में रुकावट डाली गई, और कानून के नियमों की अनदेखी कर मनमानी की गई। यह मेरे साथ-साथ कानून का भी अपमान है,” प्रदीप त्यागी ने कहा।

‎उनके अथक प्रयासों के बाद, 25 अगस्त 2025 को आयुष त्यागी की जमानत याचिका को अंततः स्वीकार कर लिया गया। हालांकि, त्यागी ने इस पूरे प्रकरण को अपने और अपने पेशे के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। उन्होंने वेव सिटी एसीपी प्रिया श्री पाल और संबंधित पुलिस अधिकारियों की कथित मनमानी के खिलाफ घोर निंदा की और इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है।

‎इस मामले में अभी तक पुलिस प्रशासन या एसीपी प्रिया श्री पाल की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह घटना गाजियाबाद में पुलिस प्रशासन और कानूनी पेशे से जुड़े लोगों के बीच तनाव को उजागर करती है। इस मामले पर आगे की जांच और कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।

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