उत्तर प्रदेश

मुरादनगर : जब सड़क पर नमाज पढ़ने की अनुमति नही तो जागरण के लिए सड़क बंद क्यो ?

रिपोर्ट : अबशार उलहक

हाल ही में गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में बिना परमिशन के शोभा यात्रा को पुलिस द्वारा रोका गया जिसमें पुलिस की कार्यशैली की सभी ने जमकर खूब प्रशंसा की मगर मुरादनगर कस्बे में आज एक घटना ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया हुआ है, जहां मुरादनगर के सरना रोड पर बीच सड़क पर टेंट लगाकर जागरण का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन के लिए सड़क को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बन गया है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब इसकी तुलना अन्य नियमों से करते हैं, जैसे कि सड़क पर नमाज पढ़ने की सख्त मनाही, जो प्रशासन द्वारा सख्ती से लागू की जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये नियम सभी के लिए समान हैं, या यह आयोजन किसी विशेष के लिए अनुमति के तहत कराया जा रहा है।

मुरादनगर, गाजियाबाद जिले का एक व्यस्त कस्बा है, जहां सड़कें पहले से ही यातायात के दबाव का सामना करती हैं। सरना रोड जैसे मार्ग पर टेंट लगाकर जागरण का आयोजन न केवल यातायात को प्रभावित करता है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए असुविधा का कारण भी दोपहर से बना हुआ है । जागरण, जो एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, आमतौर पर समुदाय को जोड़ने और भक्ति भावना को बढ़ाने का माध्यम होता है। लेकिन जब इसे सार्वजनिक स्थान पर इस तरह आयोजित किया जाता है कि आम जनजीवन बाधित हो, तो यह विवाद का विषय बन जाता है।

वही कुछ लोगों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों के लिए सड़क बंद करना अनुचित है, खासकर तब जब प्रशासन अन्य समुदायों के लिए समान परिस्थितियों में सख्ती दिखाता है। वहीं, कुछ का तर्क हो सकता है कि यह एक परंपरा का हिस्सा है और इसके लिए उचित अनुमति ली गई होगी। हालांकि, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि क्या इस आयोजन के लिए प्रशासन से अनुमति ली गई थी, और यदि हां, तो किन शर्तों के तहत दी गई है जो सड़क पर बल्ली लगाकर रास्ते को रोककर बीचो-बीच जागरण कराया जा रहा है।

यह स्थिति प्रशासन के सामने एक चुनौती पेश करती है। क्योकि सभी ऐसे आयोजनों को सार्वजनिक पार्क, मैदान या निजी परिसर में स्थानांतरित किया जा सकता है, ताकि सड़क पर आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो। मुरादनगर का यह मामला हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या नियम और कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होते हैं? यदि सड़क पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं है, तो सड़क रोककर जागरण करने की अनुमति कैसे दी जा सकती है? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए, ताकि लोगों के मन में उठ रहे संदेह दूर हो सकें। साथ ही, यह भी जरूरी है कि जब इस रास्ते से महज कुछ कदम पर मस्जिद है तो रास्ते पर जागरण करने की परमिशन कैसे दी गई?

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