नोएडा में अश्लील सामग्री बनाने के अंतरराष्ट्रीय रैकेट का खुलासा, कैसे कमाए 15 करोड़ देखे..
Published by धर्मेंद्र शर्मा

नोएडा (धर्मेंद्र शर्मा ): प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें ऑडिशन के बहाने युवतियों को बुलाकर अश्लील सामग्री बनाई जाती थी। यह रैकेट नोएडा के सेक्टर-105 में संचालित हो रहा था और साइप्रस समेत कई अन्य देशों तक फैला हुआ था।
ईडी की छापेमारी और बड़ा खुलासा
ईडी ने शुक्रवार को एक दंपती के घर छापा मारकर इस रैकेट को बेनकाब किया। जांच के दौरान पता चला कि उज्ज्वल किशोर और उसकी पत्नी नीलू श्रीवास्तव अपने घर में एडल्ट वेबकैम स्टूडियो चला रहे थे। यहां से बनाई गई सामग्री कई अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों पर अपलोड की जा रही थी। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि इस रैकेट के तार साइप्रस के अलावा कई यूरोपीय और अफ्रीकी देशों से जुड़े हुए थे।
युवतियों को ऐसे फंसाया जाता था
दिल्ली-एनसीआर की कई युवतियों से सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क किया जाता था। मॉडलिंग ऑडिशन के विज्ञापन देकर उन्हें नोएडा स्थित घर बुलाया जाता था। वहां पहुंचने पर आरोपी की पत्नी उन्हें अश्लील वीडियो बनाने का प्रस्ताव देती थी। इस प्रस्ताव में 1 से 2 लाख रुपये महीना कमाने का लालच दिया जाता था। कई युवतियां इस जाल में फंस जाती थीं। छापेमारी के दौरान ईडी को वहां तीन युवतियां मिलीं।
रूस के सेक्स सिंडिकेट से जुड़े तार
जांच में यह भी सामने आया है कि इस रैकेट का सरगना उज्ज्वल किशोर पहले रूस के सेक्स सिंडिकेट का हिस्सा रह चुका है। बाद में उसने भारत में पत्नी के साथ मिलकर इस अवैध धंधे को शुरू किया। शुरुआत में फेसबुक पर पेज बनाकर युवतियों को लुभाया गया और धीरे-धीरे यह रैकेट अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म तक फैल गया।
500 से अधिक युवतियों को हायर करने का आरोप
इस रैकेट में युवतियों को अलग-अलग श्रेणियों में काम दिया जाता था। एक्टिंग के अनुसार उन्हें भुगतान किया जाता था, जिसमें हाफ फेस शो, फुल फेस शो और न्यूड कैटेगरी शामिल थीं। आरोपी क्रिप्टो करेंसी के जरिए भुगतान प्राप्त करते थे और पति-पत्नी मिलकर रकम को अपने साथियों में बांटते थे। आशंका है कि अब तक 500 से अधिक युवतियां इस रैकेट का हिस्सा बन चुकी हैं।
गलत पर्पज कोड देकर ली गई विदेशी रकम
दंपती ने विदेशी भुगतान प्राप्त करने के लिए गलत ‘पर्पज कोड’ का इस्तेमाल किया। उन्होंने बैंकों को विज्ञापन, मार्केट रिसर्च और जनमत संग्रह के नाम पर गलत जानकारी दी। पर्पज कोड किसी भी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा अंतरराष्ट्रीय भुगतान की प्रकृति स्पष्ट करने के लिए जारी किया जाता है। जांच में सामने आया है कि इन लोगों ने इस कोड का दुरुपयोग कर अवैध रूप से पैसा कमाया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच जारी
ईडी इस मामले में साइप्रस समेत अन्य देशों की स्ट्रीमिंग कंपनियों से दंपती के संबंधों की जांच कर रही है। साथ ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।